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आमतौर पर जब बचà¥à¤šà¥‡ के पेट में गड़बड़ होती है या जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खा लेने पर उलà¥à¤Ÿà¥€ होती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पीने के बाद पेट हलà¥à¤•ा-सा à¤à¥€ दब जाठतो उलà¥à¤Ÿà¥€ हो जाती है। इन सामानà¥à¤¯ हालात को छोड़ दें तो कई बार पेट के संकà¥à¤°à¤®à¤£ या फूड पॉयजनिंग के कारण à¤à¥€ उलà¥à¤Ÿà¥€ होती है। बार-बार की उलà¥à¤Ÿà¥€ का सबसे बड़ा खतरा होता है शरीर में पानी की कमी।
उलà¥à¤Ÿà¥€ होने से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इससे वे बेहद कमजोरी महसूस कर सकते हैं, इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ वापस लाने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ फूड दें. लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ फूड में बचà¥à¤šà¥‡ को फलों का रस, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤¯à¥‚री, हलà¥à¤•ा सूप, चावल का पानी जैसी चीजें दे सकती हैं.
यह पेट का à¤à¤• वायरल इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ होता है। इसमें उलà¥â€à¤Ÿà¥€, दसà¥â€à¤¤, बà¥à¤–ार और पेट में दरà¥à¤¦ जैसे लकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं। पेट में फà¥à¤²à¥‚ होने पर कà¥à¤› दिनों तक शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो सकती है। उलà¥â€à¤Ÿà¥€ और दसà¥â€à¤¤ की समसà¥â€à¤¯à¤¾ गैसà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤‚टेसà¥â€à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨à¤² या किसी तंतà¥à¤° में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है।
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